“26 जनवरी 2025 और हम”

मेरा प्यारा देश महान, 26 जनवरी जिंदाबाद ,हिंदुस्तान जिंदाबाद।

आज देश ऐसी राह पर खड़ा है, जहां उसे विकास और शिक्षा की जरूरत है। मगर इस देश की राजनीति में ऐसे मुश्किल हालात पैदा कर दिए गए हैं जहां उसकी उन्नति रुक सी गई है। देश का विकास तो नहीं हो रहा है लेकिन देश में धर्म युद्ध की सूरत बन गई है। मैं जो कह रहा हूं ,यह भी हो सकता है की राजनीति में ले लिया जाए । लेकिन सच्चाई क्या है इससे देश का हर व्यक्ति जानता है। इस देश का आने वाला भविष्य क्या होगा, यह तो ईश्वर ही जानता है। मगर हमारी आजादी का जो मकसद था वह पूरा नहीं हो रहा है। धार्मिक मामले उठाए जा रहे हैं, हिंदू मुस्लिम एकता को क्षीण किया जा रहा है। बजाए देश की उन्नति और सौहार्द को कायम रखने के, उसे नष्ट किया जा रहा है। जब हम 26 जनवरी और 15 अगस्त को” सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” और” वंदे मातरम “के तराने गाते थे। देश का हर व्यक्ति देशभक्ति के भाव से भर जाता था। अगर इस देश में हिंदू- मुस्लिम एकता का संदेश नहीं दिया गया, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां निहायत ही कष्ट में होगी। विकास कार्य रुकेगा आपसी मतभेद बढ़ेगा, नफरतें बढ़ेंगी।
हिंदू मुस्लिम जो सभी एक साथ मिलकर देश का विकास कर रहे थे, उनके तालमेल ररुकेगे और देश विकास की ओर न बढ़कर गंदी राजनीति का शिकार बन जाएगा।
इसमें कोई दो राय नहीं की देश का मौजूदा हर नेता इस बात को जानता है और समझता है कि देश में एकता की जरूरत है। मगर अपने राजनीतिक फायदे के लिए लोग गलत रास्ता चुन रहे हैं। यह देश सबकी मां है, एक मां पैदा करती है और दूसरी मां पालती है। यहां की मिट्टी जहां अन्न पैदा होते हैं, उसे ही खाकर बच्चा बड़ा होता है, और शक्तिशाली बनता है। फिर इसे हम मां क्यों नहीं मानते हैं। मुसलमान इसी मिट्टी में दफन होता है। अपनी मां के  गोद में सो जाता है।हिंदू की आत्मा इसी वातावरण में विलीन होकर स्वर्ग लोक जाती है। दूसरे धर्म के लोग इसी वातावरण में धरती मां में समाहित होते हैं ,फिर हम इसके प्रति विवादित क्यों हैं?
वंदेमातरम, जय हिंद, जय भारत, हिंदुस्तान जिंदाबाद, मेरा देश महान।

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